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पिरामिड के पास भारतीय देवी-देवताओं और लिपि की नक्काशी क्यों की जाती है?

प्राचीन मिस्र के गीजा पिरामिड और भारत के बीच गहरा संबंध दर्शाने वाली हालिया पुरातात्विक खोजें सामने आई हैं। इजिप्ट के वैली ऑफ द किंग्स में मिले तमिल-ब्राह्मी और संस्कृत इंस्क्रिप्शन प्राचीन भारत-मिस्र व्यापार को प्रमाणित करते हैं।

प्रमुख खोजें  
इजिप्ट के वैली ऑफ द किंग्स में हाल ही में 20 तमिल-ब्राह्मी और 10 संस्कृत-प्राकृत इंस्क्रिप्शन मिले, जो दक्षिण और उत्तर भारत से व्यापारियों के दर्शन को दर्शाते हैं।

• प्रोफेसर इंगो स्टॉर्च और शार्लो स्मिड की 2020 की डिजिटल इमेजिंग से ये पुष्टि हुई।
• नाम जैसे 'सिकाई कोरान वारा कांता' का अर्थ है 'सिकाई कोरान यहां आया और देखा', जो व्यापारिक सौदे का प्रमाण है।


व्यापारिक संबंध  :- 
पहली-तीसरी शताब्दी में तमिल और अन्य भारतीय व्यापारी मिस्र पहुंचे, जहां ग्रीक व्यापारियों की परंपरा से प्रभावित होकर अपने नाम उकेरे।

• बैरनाइक बंदरगाह पर वृष्णी त्रिमूर्ति (कृष्ण, बलराम आदि) की मूर्ति मिली, जो 1800 वर्ष पुरानी है।
• मसाले, मोती, सोना-चांदी का आदान-प्रदान; भारतीयों ने अपना शहर बसाया। 

मिथक का खंडन :- 
• कृष्ण की मृत्यु 3102 ईसा पूर्व मानी जाती है, मूर्ति इससे बहुत बाद की।
• आया और देखा' फ्रेज व्यापारिक अनुबंध था, सामान की गुणवत्ता जांच का प्रमाण।




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